Wednesday, June 9, 2010

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कुछ के चेहरे खिले खूब तो कुछ उदास हो गए
कुछ दूर हुए   किसी  से  तो  कुछ पास हो गए
मुहब्बत की तासीर के   रंग  अलग   अलग हैं
 
कुछ आशियाने में रहे तो कुछ देवदास हो गए.
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बज़्म में खड़े थे उस वक़्त कई आला कतार में
फिर भी बिकने चला गया मै उनके बाज़ार में
जब तक  बिका  न  था  ,  कोई पूछता  न  था
बिका तो  कई   कदरदान हुए  इस  जवार  में.
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यूँ  ही   बेसबब   लोग     नहीं   रोते
रात   है फिर    भी लोग   नहीं सोते
क्या करें इश्क यूँ ही पूरा नहीं होता
जब   तक   लोग   कुछ    नहीं खोते.
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जिसकी फिराक में न बोला , वह मुझे   भुलाने लगा
जिसे दिल   दिया  मैंने , वह   मुझे    सताने   लगा
मुहब्बत का गम दोस्तों से दूर करूँगा,सोचा था मगर
गम जिसे सुनाने चला , वह गम अपना बताने  लगा
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बेखुदी    बेसबब    नहीं    होती
बेबसी  यूँ   सबको   नहीं  होती
हम ही रोया फिरा करते हैं क्यूँ
क्यूँ  ये  दर्द  उनको नहीं  होती.
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मेरे मन  में तेरी    अदाओं   का रहगुज़र   आज   भी है
मेरी   आँखों       को     तेरा   इन्तजार   आज  भी   है
तू   मिले    तो    मेरे   बंज़र खेतों  में  भी पानी  बरसे
तू ना मिले तो क्या हुआ ,तुझसे प्यार  मुझे आज भी है.
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दुआ    है    कि  बरक़रार  ये   उमर रखिये
बेखबर    होकर भी   उनकी   खबर रखिये
इतना न   देखो उनको  कि बुरा मान जाएँ
तब तक अपनी नजरों पर भी नजर रखिये.

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मेरी जिन्दगी तो इक दिया,जो कभी जला ही नहीं
जिसे  चाहा   मै  दिल  से  वो मुझे मिला  ही  नहीं
कोशिश   तो   बहुत   की 
उसे     पाने    की  मगर
मेरे  देखने   से  क्या  हो , जब  वो   मुडा  ही नहीं.
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नजदीकियों में भी फासले हैं बहुत
इश्क  में गम   के मामले  हैं बहुत
सब   खोता  है तो  खो जाय मगर
इश्क   पाने  के  हौंसले  हैं   बहुत.
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सौन्दर्य का तीर साधू  को मजलूम कर गया
विषय ही ऐसा है ये दाँतों तले खून कर गया
कभी  थे  हम  भी फ़कीर पर  अब  ढह  गए
मिला था कोई  जल्द  जो मजनून कर गया.
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Sunday, May 23, 2010

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आब-ए-तल्ख़ है संग ,तुझसे  मिली दूरी से
कलम  रोती  है  मेरी,  गम की तहरीरी से
आगाज-ए-उल्फत ने ही मैकश बना दिया
जुड़ा  मै   अब ,  तेरे  नाम  की फकीरी से.

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