रुआब-ए-इश्क
जीवन में किसकी रुआब है ? दिन के आफताब की या रात के माफताब की !
Saturday, April 16, 2011
*
हमको
मालूम
है
ये
इश्क
तेरे
स्वाद
के
सिवा
कुछ
नहीं
!
जो
पड़े
तेरी
फिकर
में
वो
बर्बाद
के
सिवा
कुछ
नहीं
!!
अब
कोई
डर
न
रहा
लुटने
का
मुझे
,
मेरे
पास
शायरी
,
शराब
औ
'
तेरी
याद
के
सिवा
कुछ
नहीं
..!!
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