तेरा पता मालूम नहीं है,तुम सपनो में आ जाना !
मै तुझको अब कैसे भूलूँ ,ये मुझको बतला जाना !!
ख्वाब तो ये पागल मन को भी है मंजूर मगर ,
किसके घर में पानी ढूंढूं ,किसके घर में कोरापन !
तेरे कारन खुद को ढूंढूं , ये मेरा दीवानापन !!
जीवन में किसकी रुआब है ? दिन के आफताब की या रात के माफताब की !
No comments:
Post a Comment