Sunday, April 17, 2011

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ग़मों  से  निकला  इक  पौधा  है  जिन्दगी  का !
उजड़ा   घरौंदा   इक  घरौंदा  है  जिन्दगी  का !!
हमको मालूम है कि आशिकी का जाम मँहगा है
मंहगाई  भी मगर  इक  सौदा  है  जिन्दगी का !!


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